राम कहूं या कृष्ण कहूं , उसके नाम अनेक हैं ।
किस नाम से उसको पुकारू ,बसे हृदय में श्याम एक हैं ।।
क्या कहूं उसके बारे में कण - कण में समाया श्याम हैं। जब बांसुरी बजाता है ,चारों ओर रास रचाता है ।।
तेरा रास देख कर शिवजी भी आना चाहते हैं।
तूने ऐसा क्या किया ,सब तेरा हो जाना चाहते हैं।।
तेरी लीला अनेक है, जब तू रूप दिखाता है।
तुझको कोई जान न पाता है, बस रूप तेरा बस जाता है ।।
राम कहूं या कृष्ण कहूं , कलयुग में तेरा सहारा है।
जब कोई पास नहीं होता है, तब तू ही नजर आता है।।
राम कहूं या कृष्ण कहूं ,बस तेरा ही सहारा है।
राम कहूं या कृष्ण कहूं ,बस तेरा ही सहारा है।।